उदंती-सीतानदी में जंगल कटाई का बड़ा खुलासा! 30 हजार पेड़ काटे जाने का अनुमान, 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण
अंतिम सीमा DGPS ड्रोन मैपिंग के बाद तय होगी

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र में वनभूमि अतिक्रमण और बड़े पैमाने पर जंगल कटाई का मामला सामने आया है। वन विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार वर्ष 2016 से 2026 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे काटे गए हैं, जबकि GPS आधारित जांच में करीब 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण सामने आया है। अंतिम सीमा DGPS ड्रोन मैपिंग के बाद तय होगी।
22 सितंबर को वन विभाग की टीम के निरीक्षण में 1100 से अधिक पेड़ों पर गडलिंग के निशान और बड़ी संख्या में ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ मिले। विभाग अब GPS/DGPS, ड्रोन इमेजरी और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए वन कटाई और अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहा है।
ISRO की तस्वीरों में भी दिखे संकेत

वन विभाग के अनुसार ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में वर्ष 2006 और 2012 में क्षेत्र में घना वन दिखाई देता है, जबकि करीब 2017 के बाद वन क्षेत्र के धीरे-धीरे खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर 2016 से 2026 के बीच करीब 30 हजार पेड़-पौधे हटाए जाने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक करका गांव सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में था और 1980 के दशक में विस्थापित किया गया था। 55 लोगों को मुआवजा दिए जाने के बावजूद बाद में वन क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण और कटाई की गतिविधियां सामने आईं। वर्ष 2016 में करीब 22 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर 22 लोगों के खिलाफ POR दर्ज हुआ था। वर्ष 2023 में अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
वन अमले को रोकने का भी आरोप

22 सितंबर को उप निदेशक के नेतृत्व में करीब 20-25 वनकर्मी क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान विभाग के अनुसार करीब 50-60 लोगों ने सरकारी कर्मचारियों को कर्तव्य निर्वहन से कथित रूप से रोका और एक व्यक्ति को मौके से ले गए। घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी किए जाने की बात कही गई है। मामले में 23 सितंबर को मुकेश मरकाम, केशनाथ उर्फ गोलू सहित अन्य के खिलाफ POR दर्ज किया गया है।
वन्यजीवों के लिए भी बढ़ सकता है खतरा
वन विभाग ने करका क्षेत्र को हाथियों के आवागमन और महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास वाला क्षेत्र बताया है। लगातार पेड़ कटने और वनभूमि को कृषि क्षेत्र में बदलने से वन्यजीव आवास प्रभावित होने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई गई है।
USTR प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि मुक्त कराई जा चुकी है। विभाग का कहना है कि सीमित स्टाफ के बावजूद ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और GPS/DGPS तकनीक के जरिए वन संरक्षण की कार्रवाई जारी है।
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