नवापारा के डॉ. अनमोल शर्मा को मिला ‘संस्कृत युवा रत्न’ सम्मान, छत्तीसगढ़ का नाम किया गौरवान्वित, शुभचिंतकों ने दी बधाई
नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित वेदव्यास गुरुकुल परिसर में आयोजित अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन में मिला सम्मान, छत्तीसगढ़ का नाम किया गौरवान्वित

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नवापारा नगर के डॉ. अनमोल शर्मा को प्रतिष्ठित ‘संस्कृत युवा रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित वेदव्यास गुरुकुल परिसर में आयोजित गरिमामय समारोह में श्रीराम मंदिर अयोध्या धाम के ट्रस्टी एवं परम पूज्य स्वामी श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज के पावन करकमलों से डॉ. शर्मा को यह सम्मान प्रदान किया गया। उन्हें प्रशस्ति पत्र, वस्त्र, उपहार के साथ 51 हजार रुपये की सम्मान राशि एवं आशीर्वाद भी प्रदान किया गया।
गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास
अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन की शुरुआत लगभग 120 वर्ष पूर्व महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी ने की थी। सम्मेलन का मूल उद्देश्य देवभाषा संस्कृत के प्राचीन गौरव एवं वैभव को पुनर्स्थापित करना तथा इसे विश्व मंच पर सर्वोच्च स्थान दिलाना रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए सम्मेलन द्वारा संस्कृत भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्वानों एवं युवाओं को सम्मानित किया जाता है।
इसी कड़ी में नई दिल्ली के वसंत कुंज स्थित वेदव्यास गुरुकुल परिसर में आयोजित समारोह में डॉ. अनमोल शर्मा को संस्कृत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘संस्कृत युवा रत्न पुरस्कार’ से नवाजा गया।
देश के प्रतिष्ठित विद्वानों की रही मौजूदगी
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति श्रीनिवास बरखेड़ी, चयन समिति के अध्यक्ष रमेश कुमार पाण्डे, सम्मेलन के महासचिव रमाकांत गोस्वामी, महर्षि पाणिनी संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रोफेसर शिवशंकर मिश्र सहित डॉ. कनुप्रिया गोस्वामी, आर.एन. वत्स समेत लाल बहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के आचार्यगण, विद्यार्थी एवं गुरुकुल के बटुक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संस्कृत जगत का सम्मान
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. अनमोल शर्मा ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे संस्कृत जगत का सम्मान है। संस्कृत को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर इसे जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “पठन-पाठन हमारा धर्म है।”
डॉ. शर्मा ने यह सम्मान देवी वागीश्वरी, अपने गुरुजनों और छत्तीसगढ़ महतारी के श्रीचरणों में समर्पित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है।
बता दे कि डॉ. अनमोल शर्मा नई दिल्ली स्थित लालबहादुर शास्त्री केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत साहित्य विषय के सहायक प्राध्यापक हैं। वे ब्रह्मदत्त एवं सुषमा शर्मा के पुत्र तथा गोवर्धन शर्मा के भतीजे हैं। संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में उनकी उपलब्धि से नवापारा राजिम सहित पूरे छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल है।
शुभचिंतकों ने दी बधाई
डॉ. अनमोल शर्मा को सम्मान मिलने पर बृजमोहन अग्रवाल, राजेश सीताराम पुजारी, चंद्रशेखर साहू, महेश रामेश्वर प्रसाद शर्मा, चंदुलाल साहू, गिरीश बिस्सा, चन्द्रमण शर्मा, इन्द्र कुमार साहू, रोहित साहू, आर.बी. शर्मा, विवेक शर्मा, लालचंद बंगानी, डॉ. टी.एन. रमेश, डॉ. राजेन्द्र गदिया, पुष्पा बहन जी, मनमोहन अग्रवाल, गिरधारी अग्रवाल, राजू काबरा, श्याम किशोर शर्मा, अशोक गंगवाल, रमेश पहाड़िया, रमेश चौधरी, देवरी वाले अशोक अग्रवाल, रिखबचंद बोथरा, अमर मखीजा, संतदास फोटानी, राज विजय बोथरा सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं ने शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने डॉ. शर्मा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।
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