PM ग्राम सड़क की बदहाली पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, गड्ढों में रोपे धान और लगाए बेशरम के पौधे, जल्द मरम्मत नहीं तो चक्काजाम
सड़क के गड्ढों में धान रोपकर बोले ग्रामीण- अब नहीं चलेगा बहाना

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद जिले में विकास के दावों के बीच एक जर्जर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क ने सरकारी व्यवस्था की पोल खोल दी है। सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि बारिश का पानी भरते ही पूरा मार्ग खेत जैसा नजर आने लगा। परेशान ग्रामीणों ने भी इस बार शिकायत या ज्ञापन का रास्ता छोड़कर अनोखे अंदाज में विरोध जताया।
सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतरे, शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सड़क के गड्ढों में बाकायदा धान के पौधे रोप दिए। इतना ही नहीं, जिम्मेदारों को आईना दिखाने के लिए ग्रामीणों ने सड़क किनारे बेशरम के पौधे भी लगा दिए।
सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों की बदहाल स्थिति और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी है। मंगलवार को ग्राम गौरघाट, देहारगुड़ा, गिरहोला, आमागुड़ा, सिंहार और रामपारा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा जर्जर सड़क को लेकर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया।
आक्रोशित ग्रामीणों ने जर्जर सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में जमा पानी के बीच धान के पौधे रोपे। इसके साथ ही सड़क किनारे बेशरम के पौधे लगाकर जिम्मेदार विभाग के प्रति अपना विरोध जताया। ग्रामीणों के इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए सड़क से गुजरने वाले लोगों की भी भीड़ जुट गई।
आश्वासन तो मिला, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ
ग्रामीणों के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस मार्ग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था, जो करीब तीन साल बाद पूरा हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी और बड़े-बड़े गड्ढे हो गए। सड़क की खराब स्थिति को लेकर कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों से शिकायत की गई और मरम्मत का आश्वासन भी मिला, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि अब विभाग के अधिकारी सड़क की पांच वर्ष की गारंटी अवधि समाप्त होने की बात कह रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के शुरुआती वर्षों में ही जगह-जगह से सड़क उखड़ गई थी, बावजूद इसके शिकायतों के बाद भी समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। इसका खामियाजा अब गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा सहित आसपास के गांवों के हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर करीब एक दर्जन से अधिक स्कूल स्थित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। सड़क पर बने गहरे गड्ढों और जर्जर मार्ग के कारण आए दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है। बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है, जिससे राहगीरों और स्कूली बच्चों को आवागमन में भारी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर शासन-प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर धरातल पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कें बदहाली का शिकार हैं। कई बार शिकायत के बावजूद सुनवाई नहीं होने से मजबूर होकर ग्रामीणों ने सांकेतिक रूप से यह अनोखा प्रदर्शन किया है।
चक्काजाम करने की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जर्जर सड़क की जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदर्शन के दौरान सोहन नागेश, पवन दीवान, महेश दीवान, रंजित सिंह दीवान, संजय दीवान, लिलाधर दीवान, हुमनसिंग, पालसिंग, छबिराम, गुमान सिंह, गोवर्धन नागेश, केसर नेगी, पिलेश्वर ध्रुवा, रेमन सिंह दीवान, राजू सेन, सिलेश्वर, भारत कुलदीप, धनेश मरकाम, दुलचंद मरकाम, यशकुमार दीवान, हेमंत दीवान, मेघलाल यादव, शोभाराम मरकाम, पानसिंग दीवान, भरत दीवान, नकछेड़ा दीवान, सेवनलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे।
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