आरएसएस के पथ संचलन का नवापारा गायत्री परिवार ने पुष्प वर्षा कर किया स्वागत, शताब्दी वर्ष में सेवा और राष्ट्रसमर्पण का संदेश

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी के पावन पर्व पर आयोजित पथ संचलन में संगठन की एकजुटता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना देखने को मिली। इस अवसर पर गायत्री परिवार नवापारा के कार्यकर्ताओं ने पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का स्वागत एवं सम्मान किया। कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका का संदेश दिया गया।
विजयादशमी पर पथ संचलन से दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
विजयादशमी के अवसर पर गौरीशंकर कश्यप के नेतृत्व में स्वयंसेवकों का पथ संचलन आयोजित किया गया। इसमें स्वयंसेवकों की भागीदारी के साथ अनुशासन और एकजुटता का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, आपसी सद्भाव और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका पर जोर दिया गया।
एन.डी. मानिकपुरी ने बताया विजयादशमी का महत्व

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रांत संचालक एन.डी. मानिकपुरी ने विजयादशमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व साहस, अनुशासन और सदाचार के साथ राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने संघ की सौ वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन ने सेवा, संस्कार, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को केंद्र में रखकर कार्य किया है। उन्होंने राष्ट्रहित में समाज की सहभागिता और सकारात्मक सामाजिक योगदान के महत्व पर भी विचार रखे।
वर्ष 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे किए। वर्ष 1925 में नागपुर से शुरू हुई संघ की यात्रा आज एक व्यापक सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधि के रूप में देखी जाती है। संघ की इस यात्रा में अनुशासन, संगठनात्मक एकजुटता और निस्वार्थ सेवा को प्रमुख आधार बताया जाता है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्वयंसेवकों ने पथ संचलन के माध्यम से संगठन के विचारों और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का संदेश दिया।
गायत्री परिवार ने किया स्वयंसेवकों का स्वागत
इस अवसर पर गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने नवापारा के शीतलापारा स्थित गायत्री मंदिर में पथ संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का पुष्प वर्षा और तिलक लगाकर सम्मान किया। इस पहल को सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और राष्ट्रहित में कार्य करने की भावना से जोड़कर देखा गया। कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, अनुशासन और सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
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