बिलासपुर हाईकोर्ट में किशोर न्याय पर मंथन, 20 जिलों के CWC अध्यक्ष-सदस्यों ने साझा किए अनुभव

हाईकोर्ट बिलासपुर में हुआ 11वां State-Level Stakeholders Consultation

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के क्रियान्वयन के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर बिलासपुर में 11वें राज्य स्तरीय Stakeholders Consultation का आयोजन किया गया। “The Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 and a Decade of Implementation and the Way Forward” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में बाल संरक्षण व्यवस्था की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की मौजूदगी में हुआ आयोजन

30 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम मुख्य अतिथि माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तथा माननीय न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल, न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल, न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु और न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) सहित किशोर न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। वहीं छत्तीसगढ़ के 20 जिलों से बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने भी सक्रिय सहभागिता की।

बाल संरक्षण व्यवस्था की हुई समीक्षा

राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के पिछले दस वर्षों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और बाल हितैषी बनाने के लिए भविष्य की दिशा एवं रणनीति पर चर्चा करना रहा।

परामर्श के दौरान बाल संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विभागीय समन्वय और बेहतर कार्यप्रणाली को लेकर विचार साझा किए गए। बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, बाल देखभाल संस्थाओं की व्यवस्था और किशोर न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच Inter-Departmental Coordination को मजबूत करने तथा बच्चों के सर्वोत्तम हित को केंद्र में रखकर कार्य करने पर विशेष जोर दिया गया।

साथ ही किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के दौरान मैदानी स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

20 जिलों से CWC अध्यक्ष एवं सदस्यों की सहभागिता

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के 20 जिलों से पहुंचे बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। बाल कल्याण समितियां देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में समितियों के जमीनी अनुभवों और सुझावों को किशोर न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

बाल अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम में न्यायपालिका, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग, SCPCR तथा बाल अधिकार संरक्षण से जुड़े अन्य प्रमुख Stakeholders की सहभागिता रही। सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों के सर्वोत्तम हित में प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।

राज्य स्तरीय यह परामर्श कार्यक्रम बाल अधिकारों की सुरक्षा, बच्चों के सर्वोत्तम हित तथा किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और बाल हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में संपन्न हुआ।

छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl

यह खबर भी जरुर पढ़े

‘सशक्त युवा, सशक्त भारत’ की थीम पर गरियाबंद में विधिक जागरूकता शिविर, छात्रों को कानून और अधिकार की दी गई जानकारी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button