गरियाबंद पीजी कॉलेज में शुरू हुआ विशेष प्रशिक्षण: विद्यार्थियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने की पहल, 90 घंटे के कम्युनिकेटिव इंग्लिश कोर्स का शुभारंभ

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– जनजातीय अंचल के विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाने और उनके भीतर संप्रेषण कौशल का विकास करने के उद्देश्य से शासकीय वीर सुरेंद्र साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गरियाबंद में 90 घंटे के कम्युनिकेटिव इंग्लिश कोर्स (CEC) का शुभारंभ किया गया। उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार शुरू किए गए इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों की अंग्रेजी भाषा के प्रति झिझक दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें भविष्य की शैक्षणिक एवं रोजगार संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार करने की पहल की गई है।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.के. तलवरे ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर किया। इस अवसर पर नवीन कन्या महाविद्यालय, गरियाबंद के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जी.एस. दास विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की संयोजक एवं अंग्रेजी की सहायक प्राध्यापक दीपशिखा टोप्पो ने विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की रूपरेखा, प्रशिक्षण की अवधि और इसके प्रमुख उद्देश्यों की जानकारी दी।
झिझक और संकोच दूर करना प्रमुख उद्देश्य
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. आर.के. तलवरे ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में अंग्रेजी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान और प्रभावी संप्रेषण कौशल विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है। विशेषकर जनजातीय अंचल के विद्यार्थियों में अंग्रेजी बोलने को लेकर जो झिझक और संकोच रहता है, उसे दूर करना इस पाठ्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित होगा और वे अपनी बात बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम बनेंगे।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. जी.एस. दास ने कहा कि आज के समय में रोजगार, उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए तथा नियमित रूप से कक्षाओं में सहभागिता करते हुए अपने संप्रेषण कौशल को निखारना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अंग्रेजी सीखने का अर्थ अपनी मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा को छोड़ना नहीं है। अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं का सम्मान बनाए रखते हुए एक नई भाषा सीखना अतिरिक्त कौशल हासिल करने जैसा है। भाषा का ज्ञान व्यक्ति के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है और उसके व्यक्तित्व को भी व्यापक बनाता है।
महाविद्यालय में शुरू किया गया यह 90 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के भाषा ज्ञान, बोलने की क्षमता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। इससे जनजातीय क्षेत्र के विद्यार्थी उच्च शिक्षा के साथ-साथ भविष्य में रोजगार के विभिन्न अवसरों और प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का अधिक आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. नीलाम्बर पटेल, डॉ. खुशी देवांगन, भेषण लाल, भावेश कुमार सहित महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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