प्रेम, संयम और सदाचार से ही जीवन में मिलती है सच्ची शांति : संत असंग साहेब

पूजा, भक्ति और सत्संग से संस्कारों का निर्माण होता है और संस्कारों से ही जीवन सुधरता है

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) अभनपुर :– राष्ट्रीय संत असंग साहेब ने रविवार को सोनपैरी आश्रम में आयोजित विशाल सत्संग सभा में हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रेम, सुख और शांति धन से नहीं खरीदे जा सकते। धन जीवन की आवश्यकता अवश्य है, लेकिन उसके पीछे अंधी दौड़ लगाकर जीवन के मूल्यों को खो देना उचित नहीं है। संत असंग साहेब ने कहा कि धनवान बनना गलत नहीं है, लेकिन रावण जैसा धनवान बनने का कोई अर्थ नहीं।

रावण के पास सोने की लंका थी, अपार वैभव था, फिर भी उसका अंत अहंकार के कारण हुआ। इसलिए धन के साथ विनम्रता और सदाचार भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त वही है जो कठिन से कठिन संघर्षों को भी मुस्कुराते हुए स्वीकार करे और हर परिस्थिति में नियम, मर्यादा तथा धर्म का पालन करता रहे।

संत असंग साहेब ने कहा कि जीवन में कष्ट आना स्वाभाविक है, लेकिन कष्ट मिलने पर भी यदि मनुष्य अपने सिद्धांतों और नियमों से विचलित नहीं होता, तभी उसकी भक्ति सफल होती है। उन्होंने कहा कि संघर्ष मनुष्य को निखारता है और धैर्य उसे महान बनाता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की नीयत साफ होनी चाहिए। पद और प्रतिष्ठा मिलने पर अहंकार नहीं आना चाहिए, क्योंकि पद स्थायी नहीं होता।

विनम्र और सेवाभावी बने रहे

उन्होंने कहा कि कई अधिकारी बड़े पद पर पहुँचकर लोगों से दुर्व्यवहार करने लगते हैं, घमंड में रहते है, सीधे मुंह बात नही करते लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद वही व्यक्ति उपेक्षित हो जाता है। उनसे कोई मिलना पसंद नही करते। इसलिए बड़े पद में आकर व्यक्ति को विनम्र और सेवाभावी बने रहना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का उदाहरण देते हुए कहा कि इतना बड़ा पद मिलने के बाद भी उनमें अहंकार नहीं है। वे पहले जैसे सरल और सहज थे, आज भी वैसे ही हैं। ऐसे व्यक्तित्व से समाज को सीख लेनी चाहिए। साधु-संतों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिसने वैराग्य धारण किया है, उसे अपने साधु धर्म की मर्यादा का पूर्ण पालन करना चाहिए। साधना कमजोर होने पर साधु जीवन सफल नहीं हो सकता।

उन्होंने संतों से कहा कि माताओं-बहनों से आवश्यक दूरी बनाए रखे तथा संयमपूर्वक जीवन जीने का आग्रह किया ताकि भक्ति और साधना की पवित्रता बनी रहे। कहा कि भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि मन की सच्ची श्रद्धा से होती है। श्रद्धावान व्यक्ति को ही ज्ञान की प्राप्ति होती है। जीवन को चिंता में नहीं, बल्कि मुस्कुराते हुए बिताना चाहिए। क्या लेकर आए थे और क्या लेकर जाओगे? ईश्वर ने हमें हँसने और मुस्कुराने के लिए जीवन दिया है, इसलिए अनावश्यक तनाव से दूर रहना चाहिए। संत असंग साहेब ने कहा कि ज्ञान, ध्यान और दान ये तीनों जीवन के ऐसे आधार हैं जिन्हें प्रतिदिन अपनाने वाला व्यक्ति सदैव सुखी रहता है।

गुरु का कभी अपमान नहीं करना चाहिए

उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि गुरु का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। गुरु ही वह शक्ति है जो साधक को आध्यात्मिक ऊँचाइयों तक पहुँचाती है, इसलिए गुरु के प्रति सदैव सम्मान और श्रद्धा बनाए रखना चाहिए। युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि किसी लड़की के पीछे दीवाना होना मुर्खता है यदि दीवाना बनना है तो भगवान, माता-पिता, भाई-बहनों और परिवार के प्रेम का दीवाना बनिए। यही जीवन को सफल और सार्थक बनाता है। उन्होंने परिवारों में बढ़ती मोबाइल की लत पर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि आज बच्चे मोबाइल में व्यस्त हैं, बहू अलग मोबाइल चला रही है और सास अलग। इससे परिवारों में संवाद और प्रेम कम होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से मोबाइल का सीमित उपयोग करने और परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि जैसे सोना आग में तपकर कुंदन बनता है, वैसे ही मनुष्य भी ज्ञान की अग्नि से गुजरकर श्रेष्ठ बनता है। पूजा, भक्ति और सत्संग से संस्कारों का निर्माण होता है और संस्कारों से ही जीवन सुधरता है। प्रवचन के दौरान संत असंग साहेब ने संत कबीर के अनेक प्रेरणादायी दोहों का भावार्थ सुनाया तथा भगवान श्रीराम ,श्रीकृष्ण ,महावीर स्वामी और बुद्ध के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धर्म, प्रेम, सेवा और सदाचार का संदेश दिया।

स्वयं को ताकतवर बनना पड़ेगा

उन्होंने श्रद्धालुओं से इन शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित न रखकर अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उनके प्रेरक एवं ओजस्वी प्रवचन से पूरा पंडाल देर तक “सत्संग” और “कबीर वाणी” की आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कहा कि लगन से काम करने से सफलता अवश्य मिलती है जिसमें दूरदृष्टि है वही लगन से काम करेगा। अयोग्य व्यक्ति को कहीं सफलता नही मिलती। भक्ति ,परोपकार हिंदु धर्म की रक्षक और राष्ट्र भक्ति कर लिए तभी यह जीवन सार्थक है। शक्ति पैदा करने का काम भक्ति और सत्संग ही दे सकता है।

दूसरो को सहयोग देने के लिए स्वयं को ताकतवर बनना पड़ेगा। परिवार के लिए जियो पर थोड़ा समय राष्ट्र के लिए,समाज के लिए,गुरूभक्ति के लिए निकालो। गरीब की मदद भी करो। गांवो में भी सत्संग होना चाहिए। हमने कई गांव में सत्संग के आयोजन में पहुंचे इससे उन गांव में बदलाव भी आया है। संस्कारी-सज्जन लोगो के बीच रहिए तो आप भी संस्कारी होकर निकलेंगे। संस्कार अच्छा मिल जाए तो व्यक्ति साधु बन सकता है वर्ना गलत संस्कार से डाकु बनने से इंकार नही किया जा सकता।

साध्वी और साधु एक साथ न घुमे

उन्होने रत्नाकर डाकु से बाल्मीकि बने और तुलसीदास का उदाहरण भी पेश किया। कहा कि यहां आश्रम आप सभी का है लेकिन यहां आने पर नियम का पालन करना होगा। कोई साध्वी और साधु एक साथ न घुमे। अपनी भक्ति की रक्षा के लिए संयत बनाएं रखे,नियमो के दायरे में रहे। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खतम होने पर उन्होने सीएम विष्णुदेव साय की तारीफ भी किया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त वर्णिका शर्मा, प्रदेश भाजपा कार्यालय प्रभारी अशोक बजाज, गोपाल यादव, रूपेंद्र साहू, गरियाबंद जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता सोसायटी संघ के महाअध्यक्ष जितेंद्र सोनकर, जेंजरा सोसायटी के अध्यक्ष महेश साहू, पोखरा सोसायटी के अध्यक्ष ललित साहू, हरख राम साहू, साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष नीरेंद्र साहू कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन सोनपैरी आश्रम के प्रभारी देवकर साहेब ने किया। मंच पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर राष्ट्रीय संत असंग साहेब का फुल माला और बुके भेंटकर स्वागत सम्मान किया। 

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