प्रारंभ हुआ पुरुषोत्तम मास : जप-तप, दान और भक्ति का मिलेगा हजार गुना फल – पं. ब्रह्मदत्त शास्त्री

पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य और कथा श्रवण से मिलती है अक्षय पुण्य की प्राप्ति

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :–  भगवान सूर्य संपूर्ण ज्योतिष शास्त्र के अधिपति हैं, सूर्य और चन्द्र के आधार पर काल निर्णय होता है इन दोनों की गतियों में जो अन्तर आता है, उसके समायोजन के लिए अधिक मास की व्यवस्था की गई, ज्योतिष भूषण पण्डित ब्रह्मदत्त शास्त्री ने इसे स्पष्ट करते हुए बताया कि सूर्य चंद्र की गति में भिन्नता होने के कारण हर तीन वर्ष में लगभग 32 महीने, 16दिन और 4घड़ी का अन्तर आ जाया करता है, इसलिए अधिक मास की धारणा बनाई गई।

इस मास का अपना धार्मिक महत्व भी है, इस मास में सभी प्रकार के कामना पूर्ति के लिए किए जाने वाले व्रत एवं अनुष्ठानों का फल नहीं मिलता है, किंतु प्रभु की भक्ति, आराधना के लिए किए जाने वाले जप, तप, व्रत आदि का फल हजार गुना होकर व्रती को मिलता है। अधिकस्य अधिक फ़लम , इसीलिए इसे अधिक मास कहते हैं, इसका एक नया नाम भी लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिया गया है, पुरुषोत्तम मास।

हिरण्यकशिपु को मारा 

इस मास का अपना पौराणिक महत्व भी है, आदि दैत्य हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा से वरदान मांगा था, कि मैं इस सृष्टि के बनाए बारह महीनों में से किसी में भी न मरूं, इसलिए इस तेरहवें महीने की व्यवस्था की गई। इस महीने में भगवान ने नृसिंह बनकर हिरण्यकशिपु को मारा था। 

ब्रह्मदत्त शास्त्री ने कहा कि इन्हीं सब कारणों से इस मास की महिमा बढ़ गई है। आज 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास रहेगा। इसमें भगवत कथाएं कराई जाती है। सूर्योदय पूर्व स्नान करके देव दर्शन करने, ध्यान दान आदि करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह जेठ का महीना चल रहा है, इस बार 2 जेठ हैं। इसलिए इस महीने में जल से भरा हुआ मटका, गुड़, शक्कर, पंखा, पड़त्रण, चप्पल, छाता, आम, खरबूज आदि दान किए जाते हैं।

भगवान के अति प्रिय वैष्णव जन इस पुरूषोत्तम मास में प्रत्येक दिन साल भर में पड़ने वाले प्रमुख उत्सवों को मनोरथ के रूप में मनाते हैं, जैसे रामनवमी, एकादशी, रथयात्रा, श्रावणी तीज, राखी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा, दीपावाली, अन्नकूट, बसन्त पंचमी, होली आदि सभी प्रमुख त्यौहार इस एक मास में धूमधाम से मनाए जाते हैं।

चंपारण धाम एवं श्री गोवर्धन नाथ जी की हवेली में प्रत्येक उत्सव एवं झाकियां मनाए जाएंगे, जिसमें सभी वैष्णव जन उत्साह पूर्वक भाग लेंगे। इस बार पुरुषोत्तम मास में नगर में विभिन्न स्थानों पर कथाओं का आयोजन भी रखा गया है।

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