रेत माफियाओं के आगे सिस्टम फेल? आदेशों की उड़ रही धज्जियां, मुख्यमंत्री के निर्देश और खनिज सचिव की चेतावनी भी बेअसर

कहीं मनरेगा तालाब में अवैध रेत डंपिंग का खेल जारी, तो कहीं दिन रात अवैध रेत उत्खनन

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गोबरा नवापारा क्षेत्र के दुलना सहित आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन और डंपिंग का मामला लगातार बढ़ता जा रहा है। मनरेगा तालाबों तक में रेत का भंडारण किए जाने के आरोप लग रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों और खनिज सचिव पी. दयानंद की चेतावनी के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं दिख रही, जिससे संबंधित विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

अभनपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम दुलना, नावागांव, कोलियारी, लखना और जौंदा सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और डंपिंग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सैकड़ों हाईवा रेत खुलेआम डंप कर दिए गए हैं, लेकिन संबंधित विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है। नदी किनारे और मनरेगा से बने तालाबों तक रेत का अवैध भंडारण किया जा रहा है। वहीं दुलना में चैन माउंटेन मशीनों से लगातार उत्खनन कर हाईवा वाहनों के जरिए दिन-रात परिवहन किया जा रहा है।

पंचायत से कोई अनुमति नहीं

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन जगहों पर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है, जिससे रेत माफियाओं के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नावागांव, कोलियारी के रास्ते नवा रायपुर तक जिम्मेदार अधिकारियों का लगातार आना-जाना होने के बावजूद इस अवैध गतिविधि पर रोक नहीं लग पा रही है, जिससे संदेह की स्थिति बन रही है।

वहीं जौंदा पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा तालाब में की गई रेत डंपिंग पूरी तरह अवैध है और पंचायत से इसकी कोई अनुमति नहीं दी गई है। इसके पहले भी ग्रामीणों ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है लेकिन कार्यवाही शून्य है।

प्रभावशाली लोगों के संरक्षण का आरोप

वहीं 8 अप्रैल को गोबरा-नवापारा तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर ने दुलना के अवैध रेत कार्यों पर कार्रवाई करते हुए नदी के भीतर बनाए गए अस्थायी रास्तों को कटवाकर ध्वस्त कराया था। लेकिन कुछ ही दिनों में माफियाओं ने उन रास्तों को फिर से तैयार कर लिया और अब पहले से अधिक तेजी के साथ अवैध कारोबार संचालित कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के आरोप भी सामने आ रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा है कि राजिम क्षेत्र के एक बड़े राजनीतिक नेता से जुड़े कुछ समर्थकों की भूमिका संदिग्ध है, जिससे इस अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है।

आदेशों की उड़ रही धज्जियां

इन दोनों मामलों में अभनपुर एसडीएम रवि सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है और जांच के निर्देश दिए जाएंगे। इधर, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने 2 दिन पहले ही कलेक्टरों की बैठक लेकर दो टूक कहा है कि यदि किसी जिले में अवैध खनन पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय उड़नदस्ता दल को आना पड़ता है, तो यह जिला प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ड्रोन सर्वे या जांच में अवैध उत्खनन पाए जाने पर कलेक्टर और खनिज अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।

इसके बावजूद क्षेत्र में जारी अवैध खनन और डंपिंग यह साफ दर्शाता है कि न तो मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन हो रहा है और न ही खनिज विभाग की सख्ती का असर दिख रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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