नवापारा में जैन समाज ने मौन बाइक रैली निकालकर सौंपा ज्ञापन, रीवा हादसे पर समाज में आक्रोश, उच्चस्तरीय जांच की मांग

रीवा (मध्यप्रदेश) दुर्घटना में परम पूज्य गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महा मुनिराज की परम प्रभाविका आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माता जी तथा श्री 105 उपशम मति माता जी के समाधि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच व संत सुरक्षा नीति की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :–   मध्यप्रदेश के रीवा जिले में दो दिगंबर जैन आर्यिका माताजी के सड़क दुर्घटना में समाधि होने की दुःखद घटना को लेकर जैन समाज का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। घटना के विरोध में गुना सहित छत्तीसगढ़ में भी जैन समाज ने राष्ट्रव्यापी मौन विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर लेकर समाजजन बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे और “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” लागू करने की मांग को लेकर भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।

नवापारा राजिम में भी सकल जैन समाज द्वारा गहरा शोक व्यक्त किया गया। इस घटना के विरोध एवं संत सुरक्षा की मांग को लेकर सकल जैन समाज के विभिन्न जनों द्वारा नगर में मौन बाइक रैली निकाली गई। नगर के जैन समाज द्वारा महावीर चौक गंज रोड में एकत्रित होकर नवापारा तहसील तक मौन रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से समाजजनों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर एसडीएम, तहसीलदार एवं थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से भारत सरकार एवं प्रशासन से रीवा घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच, जैन साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष सुरक्षा व्यवस्था तथा राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति लागू करने की मांग की गई। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विहाररत जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक, निर्लिप्त एवं पैदल विहार करने वाले होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग नहीं करते। ऐसे में उनके साथ बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

संतों की सुरक्षा करें सुनिश्चित

सकल जैन समाज ने मांग की कि रीवा दुर्घटना प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए, घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही विहाररत संतों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक समन्वय, पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण एवं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं। समाज ने प्रशासन एवं शासन से संतों के विरुद्ध अपराधों को संवेदनशील श्रेणी में रखने तथा स्थानीय स्तर पर “Sant Security Coordination Cell” गठित करने की भी मांग की।

कार्यक्रम में सकल जैन समाज के पदाधिकारी, वरिष्ठजन, युवक-युवतियां एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। समाज ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं विहाररत संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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