राजिम पुल की स्ट्रीट लाइटें 15 दिनों से बंद, दर्जनों जगह उखड़ी सड़क, आखिर किस हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार?

रोज गुजरते हैं नेता-अधिकारी, फिर भी नहीं दिख रही बदहाली

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– धर्मनगरी राजिम के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले महानदी पुल की बदहाली अब सीधे आम लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। राजिम पुल पर स्ट्रीट लाइटों की स्थिति खराब है, पिछले करीब 15 दिनों से अंधेरा पसरा हुआ बताया जा रहा है। दिन में सड़क पर दर्जनों गड्ढे और उखड़ी सतह वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा रही है तो रात में बंद स्ट्रीट लाइटें इस खतरे को कई गुना बढ़ा रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन पुलों से रोज गुजरने वाले जनप्रतिनिधि, नेता और अधिकारी आखिर कब इस गंभीर समस्या पर ध्यान देंगे? स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हो जाता, तब तक जिम्मेदार विभागों की नींद नहीं खुलती।

पुल पर अंधेरा और गड्ढों का खतरा

महानदी पर बना राजिम पुल रायपुर और गरियाबंद जिले को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। राजधानी रायपुर से जुड़ा यह मार्ग से राजिम, गरियाबंद, छुरा, मैनपुर और आगे ओडिशा की ओर बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। प्रतिदिन हजारों लोग इस पुल से गुजरते हैं। लेकिन पिछले दिनों से पुल की स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण रात में पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे में सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते और दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर कई जगह सड़क उखड़ चुकी है और दर्जनों स्थानों पर छोटे-बड़े गड्ढे बन गए हैं। कुछ जगहों पर गड्ढों से सरिया तक दिखाई देने लगी है। बारिश के दौरान पानी भर जाने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना और मुश्किल हो जाता है।

बारिश में गड्ढे बन सकते हैं जानलेवा

मुख्य मार्ग होने के कारण पुल पर दिन-रात वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से वे दिखाई नहीं देते। ऐसे में वाहन चालक अचानक गड्ढे में फंस सकते हैं या वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।

अंधेरे में मवेशी भी बन रहे बड़ा खतरा

इस मार्ग पर दर्जनों जगहों पर मवेशी का झुंड सड़क पर बैठे या खड़े नजर आते हैं। पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण वाहन चालकों को मवेशी अचानक दिखाई देते हैं और दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। एक तरफ अंधेरा, दूसरी तरफ उखड़ी सड़क और गहरे गड्ढे, ऊपर से सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी इन सबने रात में पुल पार करने को बेहद जोखिम भरा बना दिया है।

रोज गुजरते हैं नेता और अधिकारी

लोगों में सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का भी इसी मार्ग से लगातार आना-जाना होता है, इसके बावजूद बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों और बदहाल सड़क की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या नेताओं और अधिकारियों को पुल का अंधेरा दिखाई नहीं देता, या फिर आम जनता की परेशानी उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है?

लोगों का कहना है कि बड़े-बड़े विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन धर्मनगरी के प्रमुख प्रवेश मार्ग पर बुनियादी सुविधा तक दुरुस्त नहीं हो पा रही है।

बिजली बिल नहीं पटने से बंद हुई सप्लाई!

मामले में विद्युत विभाग के ईई धर्मेंद्र साहू ने बताया कि बिजली बिल का भुगतान नहीं होने के कारण विद्युत आपूर्ति रोकी गई है। यानी सरकारी विभागों के बीच बिल भुगतान और विभागीय प्रक्रिया की खींचतान का खामियाजा सीधे आम जनता भुगत रही है।

वहीं ब्रिज विभाग रायपुर के ईई गोविंद अहिरवार ने बताया कि बिजली बिल गलत स्थान पर भेजे जाने के कारण यह स्थिति बनी। उनके अनुसार विभाग की ओर से बिजली कनेक्शन नहीं काटने का निवेदन किया गया था, लेकिन विद्युत विभाग ने बिल भुगतान के बाद ही लाइट चालू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि बिल भुगतान के लिए विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगामी कुछ दिनों में स्ट्रीट लाइटें चालू होने की उम्मीद है।

15 दिन तक किसकी जिम्मेदारी थी सुरक्षा?

विभागीय अधिकारियों के जवाब से यह तो साफ है कि स्ट्रीट लाइट बंद होने के पीछे बिल और विभागीय प्रक्रिया का मामला है, लेकिन आम लोगों का सवाल इससे कहीं बड़ा है। क्या बिजली बिल और फाइलों के चक्कर में पुल पर किसी की जान चली जाती तो जिम्मेदारी कौन लेता? लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए। पुल जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था और रोशनी को किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने दिया जाना चाहिए था।

तीनों पुलों की हो तत्काल जांच

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि राजिम पुल की स्ट्रीट लाइटें तत्काल चालू कराई जाएं। बेलाही और चौबेबांधा पुल की खराब लाइटों और पुल पर गड्ढों की भी जांच कर मरम्मत की जाए। सभी गड्ढों को तत्काल भरकर सड़क की गुणवत्ता सुधारी जाए। बाहर निकली सरिया और क्षतिग्रस्त हिस्सों की तकनीकी जांच कराई जाए। बारिश के दौरान पुल पर विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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