रेलवे की लापरवाही बनी मुसीबत! बिजली बिल बकाया, पंप हाउस बंद और अंडर ब्रिज बना तालाब, ग्रामीणों के लिए बनी परेशानी

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवापारा नगर से लगे ग्राम पंचायत कुर्रा-सोनेसिल्ली मार्ग पर बना रेलवे अंडर ब्रिज इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बारिश होते ही अंडर ब्रिज में पानी भर जाता है और जल निकासी की व्यवस्था ठप होने के कारण पूरा मार्ग तालाब में तब्दील हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अंडर ब्रिज से पानी निकालने के लिए बनाया गया पंप हाउस बिजली कनेक्शन बंद होने के कारण कई महीनों से बंद पड़ा है। बताया जा रहा है कि रेलवे द्वारा बिजली बिल का भुगतान समय पर नहीं किए जाने के कारण विद्युत विभाग ने कनेक्शन काट दिया, जिसके बाद पंप हाउस भी बंद हो गया। नतीजा यह है कि बारिश का पानी अंडर ब्रिज में जमा हो रहा है और दर्जनों गांवों के लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है।
2024 से बिल भुगतान नहीं होने का दावा

ग्रामीणों के मुताबिक पंप हाउस के बिजली कनेक्शन का बिल रेलवे विभाग के नाम पर है। आरोप है कि वर्ष 2024 से बिजली बिल का भुगतान लंबित है, जिसके चलते बकाया राशि बढ़ती चली गई। बकाया भुगतान को लेकर विद्युत विभाग की ओर से संबंधित रेलवे प्रशासन को कई बार पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं होने का आरोप है।
मामले में सामने आए बिजली बिल के अनुसार जुलाई 2026 का बिल 110190 बताया जा रहा है। इसकी भुगतान की अंतिम तिथि 27 अगस्त 2026 दर्ज है। यही आंकड़ा अब कई सवाल खड़े कर रहा है।
जब पंप हाउस की जल निकासी व्यवस्था रेलवे से जुड़ी है और बिजली कनेक्शन भी रेलवे के नाम पर बताया जा रहा है, तो सवाल उठता है कि जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पंप हाउस को नियमित रूप से चालू रखने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में बिजली बिल आता रहा, लेकिन जमीन पर जल निकासी की व्यवस्था ठप पड़ी है।
अंडर ब्रिज बना ‘तालाब’, रास्ता हुआ बंद

बारिश के बाद अंडर ब्रिज में इतना पानी जमा हो रहा है कि वहां से पैदल या वाहन से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। पंप हाउस बंद होने के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। इस मार्ग से आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का आवागमन होता है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, किसान, मजदूर और कृषि व मिल से जुड़े लोग रोज इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। जलभराव के कारण लोगों को अब दूसरे रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
इमरजेंसी में कौन बचाएगा?
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में रास्ता बंद होने से सिर्फ परेशानी होती है, लेकिन बारिश के दौरान किसी आपात स्थिति में यही जलभराव गंभीर खतरा बन सकता है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने, गर्भवती महिला, बुजुर्ग या किसी दुर्घटना की स्थिति में यह रास्ता बंद होना बड़ी समस्या बन सकता है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? पंप हाउस बंद होने के बावजूद जल निकासी की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? बिजली बिल का भुगतान लंबित क्यों रहा? रेलवे और विद्युत विभाग के बीच समन्वय की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? बारिश के दिनों में जनता की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तत्काल व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही?
बदहाल व्यवस्था
ग्राम कुर्रा राजधानी रायपुर से करीब 43 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद यहां रेलवे अंडर ब्रिज की स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। एक तरफ सरकार और प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा अंडर ब्रिज है, जो बारिश के दिनों में लोगों के लिए रास्ते के बजाय रुकावट बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंडर ब्रिज का निर्माण होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि रेलवे लाइन पार करने की समस्या खत्म होगी, लेकिन जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बरसात में यह सुविधा ही मुसीबत बन गई है। ग्रामीणों ने अंडर ब्रिज में जमा पानी की तत्काल निकासी कराकर लोगों की आवाजाही बहाल करने की मांग की है।
कब तक चलेगी यह समस्या ?
बताया जा रहा है कि जलभराव की समस्या सिर्फ कुर्रा में नहीं है, बल्कि गोबरा नवापारा सहित अन्य जगहों पर बने अंडर ब्रिज की भी है। लोगों का कहना है कि बारिश हर साल आती है और जलभराव की समस्या भी हर बार सामने आती है, तो फिर इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा ?
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