सरकारी स्कूल के छात्रों का फूटा आक्रोश, शिक्षकों की शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थी; जांच की मांग

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अव्यवस्थाओं, शिक्षकों-कर्मचारियों के व्यवहार और शैक्षणिक संसाधनों से जुड़ी शिकायतों को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश कलेक्ट्रेट तक पहुंच गया। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं ने अलग-अलग शिकायत आवेदन अधिकारियों को सौंपे और कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी समस्याओं को लेकर नारेबाजी की। विद्यार्थियों ने मामले की निष्पक्ष और गोपनीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है। पूरा मामला बिलासपुर जिले के मल्हार का है।
विद्यार्थियों ने कलेक्टर के नाम सौंपे आवेदनों में स्कूल के प्राचार्य, कुछ शिक्षकों-शिक्षिकाओं, खेल एवं रेडक्रॉस प्रभारियों तथा सफाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि शिकायत करने पर उन्हें डराने-धमकाने, प्रोजेक्ट के अंक काटने अथवा अन्य तरह से परेशान किए जाने की बात कही जाती है।
संस्कृत शिक्षक पर लगाए गंभीर आरोप
शिकायतों में संस्कृत शिक्षक एस. दुबे पर कक्षा में सोने, मोबाइल पर बात करने तथा छात्राओं के साथ अनुचित भाषा एवं व्यवहार करने के आरोप लगाए गए हैं। छात्राओं ने शिक्षक के व्यवहार को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में शिक्षक की शैक्षणिक योग्यता और संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायत दबाने और धमकी देने के आरोप
विद्यार्थियों ने शिक्षिका संगीता यादव पर शिकायत करने वाले छात्रों को समझाकर चुप कराने तथा शिकायत के बाद प्रोजेक्ट के अंक काटने की धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं, शिक्षिका आर. गुप्ता के खिलाफ बदतमीजी, धमकी भरे कॉल करने तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों के साथ अपमानजनक व्यवहार की शिकायत की गई है। छात्रों का आरोप है कि स्कूल स्तर पर शिकायत करने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं हुई।
एक अन्य शिकायत में शिक्षिका वर्मा पर कक्षा संचालन में लापरवाही और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया गया है। विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षिका की अनुपस्थिति में कक्षा में ताला लगा दिए जाने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
सैनिटरी पैड और शैक्षणिक सामग्री को लेकर भी शिकायत
छात्राओं ने निःशुल्क सैनिटरी पैड और अन्य आवश्यक सामग्री के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में रेडक्रॉस प्रभारी पर सामग्री उपलब्ध नहीं कराने और सैनिटरी पैड के लिए पैसे मांगने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ विद्यार्थियों ने सामग्री के दुरुपयोग से संबंधित आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की भी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। विद्यार्थियों ने रेमेडियल शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत भी की है।
खेल और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
खेल प्रभारी को लेकर विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि खेल के नाम पर राशि लिए जाने के बावजूद आवश्यक खेल सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती और प्रभारी नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते। रेडक्रॉस प्रभारी पर भी सामग्री उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया है। सफाई व्यवस्था को लेकर छात्रों का कहना है कि कई बार कक्षाओं की सफाई का जिम्मा विद्यार्थियों पर ही डाल दिया जाता है, जिससे विद्यालय परिसर की स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को लेकर परेशानी होती है।
बच्चों से कॉपियां जांचने का भी आरोप
विद्यार्थियों ने कुछ शिक्षकों पर बच्चों से ही कॉपियां जांच करवाने, कक्षा में पढ़ाई के बजाय मोबाइल चलाने, अनुपस्थित रहने और विद्यार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करने जैसे आरोप भी लगाए हैं।
कलेक्टर और DEO से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे विद्यार्थियों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि मामले की जांच गोपनीय और निष्पक्ष तरीके से कराई जाए, ताकि शिकायत करने वाले विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी या दबाव का सामना न करना पड़े। विद्यार्थियों ने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और विद्यालय में बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से विभागीय स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है। फिलहाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और विद्यालय की व्यवस्था में किन स्तरों पर खामियां हैं।
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