एजुकेशन और परिवहन केंद्र के नाम पर चल रहा था फर्जी नेटवर्क, 7 हजार लोगों को फंसा कर वसूले 1 करोड़ से अधिक, 26 आरोपी गिरफ्तार

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– जिले में फर्जी मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर संचालित बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए साइबर पुलिस ने दरोगापारा स्थित निधि परिवहन केंद्र और श्रीमती शांति देवी सोसायटी ऑफ एजुकेशन केंद्र में छापामार कार्रवाई की। इस दौरान दोनों केंद्रों से संचालित अवैध गतिविधियों का खुलासा हुआ और दो संचालकों समेत कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर संगठित अपराध, धोखाधड़ी, कूट रचना और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। पूरा मामला रायगढ़ जिले का है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी कपिल गर्ग अपनी टीम के साथ मिलकर एक संगठित नेटवर्क चला रहा था, जिसमें दर्जनों युवतियां शामिल थीं। ये युवतियां फर्जी जीमेल आईडी और मोबाइल नंबरों का उपयोग कर यूट्यूब चैनल बनाती थीं, जिनमें नकली प्रोफाइल के फोटो और वीडियो अपलोड कर अपना संपर्क नंबर साझा किया जाता था। जब कोई व्यक्ति संपर्क करता था, तो पहले उसका बायोडाटा लिया जाता और फिर रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर यूपीआई के जरिए पैसे वसूले जाते थे।
इसके बाद पसंदीदा प्रोफाइल से बातचीत कराने और मीटिंग आईडी जनरेट करने के नाम पर दोबारा फीस ली जाती थी। व्हाट्सएप के माध्यम से क्यूआर कोड भेजकर लगातार भुगतान कराया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी महिलाओं के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर पीड़ितों से बातचीत करते थे, उनका भरोसा जीतते और शादी का झांसा देकर अलग-अलग बहानों से बार-बार पैसे ऐंठते थे।
एजुकेशन केंद्र पर भी दबिश

संदेही कपिल गर्ग से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने श्रीमती शांति देवी सोसायटी ऑफ एजुकेशन केंद्र पर भी दबिश दी, जहां संचालिका हिमांशु मेहर ने स्वीकार किया कि वह पिछले तीन वर्षों से इस नेटवर्क से जुड़ी हुई है और उसके कार्यालय से भी इसी तरह यूट्यूब के माध्यम से लोगों को ठगा जाता था।
पुलिस को निधि परिवहन केंद्र की जांच के दौरान लैपटॉप में फोटोशॉप सॉफ्टवेयर के जरिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ के प्रमाण मिले। साथ ही विभिन्न शासकीय विभागों की सील और मुहर भी बरामद की गईं। कार्रवाई के दौरान 55 मोबाइल फोन और 13 लैपटॉप समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री जब्त की गई है।
1.11 करोड़ रुपये की ठगी
जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा गिरोह कॉल सेंटर की तरह संचालित होता था, जहां प्रशिक्षित कर्मचारी स्क्रिप्ट के अनुसार लोगों से बातचीत करते थे। अलग-अलग टीम बनाकर टारगेट तय किए जाते थे और उसी के अनुसार देशभर में ठगी को अंजाम दिया जाता था। अब तक 7,693 लोगों से करीब 1.11 करोड़ रुपये की ठगी करने की बात सामने आई है।
इस मामले में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस ने प्रोफेशनल तरीके से पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन मैट्रिमोनियल साइट्स या सोशल मीडिया के माध्यम से आने वाले अनजान प्रस्तावों से सावधान रहें और किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल अवश्य करें। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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