कलेक्टर-एसपी ने बीच सड़क रोकी गाड़ियां, लहूलुहान राहगीरों को पहुंचाया अस्पताल, “गोल्डन आवर” मदद से बची जान

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– गरियाबंद बीएस उइके नीरज चंद्राकर और प्रखर चंद्राकर ने मानवता और संवेदनशील प्रशासन की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है। सड़क पर तड़पते दो घायलों को देखकर तीनों वरिष्ठ अधिकारियों ने न केवल अपना काफिला रुकवाया, बल्कि बिना किसी औपचारिकता और प्रोटोकॉल की परवाह किए उन्हें अपने शासकीय वाहन में बैठाकर सीधे अस्पताल पहुंचाया।
सुशासन तिहार से लौट रहे थे अधिकारी
घटना उस समय की है, जब कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत सीईओ थाना छुरा क्षेत्र के ग्राम कनसिघी से सुशासन तिहार कार्यक्रम से लौट रहे थे। इसी दौरान छुरा रोड स्थित कचना धुरवा के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया था। हादसे में दो राहगीर गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर लहूलुहान हालत में पड़े थे। मौके पर लोगों की भीड़ तो जुट गई थी, लेकिन तत्काल उपचार की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी।
घायलों को समय पर पहुंचाया अस्पताल
जैसे ही अधिकारियों की नजर घायलों पर पड़ी, पूरा काफिला तत्काल रोक दिया गया। तीनों अधिकारी खुद वाहन से उतरे और घायलों की हालत देखी। समय की गंभीरता को समझते हुए एम्बुलेंस का इंतजार करना उचित नहीं समझा गया। इसके बाद अधिकारियों ने खुद घायलों को अपने सरकारी वाहन में बैठाया और तेजी से जिला अस्पताल गरियाबंद लेकर पहुंचे।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम को तत्काल बेहतर उपचार के निर्देश दिए गए। डॉक्टरों के मुताबिक समय रहते अस्पताल पहुंच जाने से दोनों घायलों की हालत अब नियंत्रण में है और उनका इलाज जारी है। इस घटना ने प्रशासनिक संवेदनशीलता की नई तस्वीर पेश की है। आमतौर पर वीआईपी काफिलों और प्रोटोकॉल की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन गरियाबंद में अधिकारियों का यह मानवीय चेहरा लोगों के दिलों को छू गया।
घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने पर मिलेगा 25 हजार रुपए
कलेक्टर और एसपी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सड़क हादसों में “गोल्डन आवर” यानी पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में घायल व्यक्ति की तुरंत मदद कर अस्पताल पहुंचाना कई बार उसकी जिंदगी बचा सकता है। उन्होंने लोगों से कानूनी कार्रवाई के डर से आगे न हटने और मानवता के नाते मदद करने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि शासन की “राह वीर योजना” के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले गुड सेमेरिटन को 25 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
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