पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू का सरकार पर हमला: बाढ़ राहत में भेदभाव का आरोप, बोले- 1000 परिवार प्रभावित लेकिन बांटे सिर्फ 11 चेक

राहत शिविर नहीं, स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे रहे प्रभावित

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) नवापारा :– महानदी और खारून नदी की बाढ़ से अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में मची तबाही के बीच अब राहत वितरण को लेकर सियासत भी तेज हो गई है। पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने राज्य सरकार और प्रशासन पर बाढ़ पीड़ितों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए राहत व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए हैं।

धनेन्द्र साहू ने कहा कि अभनपुर क्षेत्र के दुलना, तर्रा, नवापारा, पारागांव, कोलियारी, लखना, नवागांव, जोंदी, चम्पारण, सेमरा, टीला, छटेरा, बनचरौदा, निसदा, गोविंदा, मुरा, रवेली, आमदी सहित दर्जनों गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके बावजूद राहत के मामले में क्षेत्र के पीड़ित परिवारों के साथ कथित तौर पर सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

बस्तर को 10 हजार की अतिरिक्त राहत, अभनपुर के लिए क्यों नहीं?

पूर्व मंत्री ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के 28 सितंबर के बस्तर दौरे का हवाला देते हुए कहा कि बाढ़ प्रभावितों को तय प्रावधानों के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 10-10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अभनपुर क्षेत्र में भी बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है, तो यहां के प्रभावित परिवारों को ऐसी अतिरिक्त राहत से वंचित क्यों रखा जा रहा है?

1000 परिवार प्रभावित, चेक मिले महज 11 को

राहत वितरण को लेकर सबसे बड़ा सवाल नवापारा शहर को लेकर उठाया गया है। धनेन्द्र साहू के अनुसार, नवापारा में करीब 1000 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 26 सितंबर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा द्वारा नवापारा में केवल 11 प्रभावित परिवारों और दुलना में 2 परिवारों को 5-5 हजार रुपये की सहायता राशि के चेक दिए गए।

इस पर धनेन्द्र साहू ने तंज कसते हुए कहा कि बाढ़ का पानी परिवार देखकर घरों में नहीं घुसा था, तो राहत भी कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित क्यों रखी जा रही है? उन्होंने सभी प्रभावित परिवारों को समान आधार पर राहत देने की मांग की।

राहत शिविर नहीं, स्वयंसेवी संस्थाओं के भरोसे रहे प्रभावित

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि अभनपुर क्षेत्र के कई बाढ़ प्रभावित गांवों में प्रशासन की ओर से पर्याप्त राहत व्यवस्था नहीं की गई। उनके मुताबिक प्रभावित लोगों को भोजन, पेयजल, आश्रय और जरूरी चिकित्सा सहायता के लिए सामाजिक एवं स्वयंसेवी संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ा।

उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान जब बड़ी संख्या में परिवार संकट में थे, तब सरकारी मशीनरी को मौके पर सक्रिय रहना चाहिए था। राहत और बचाव कार्य में प्रशासन की भूमिका को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं।

सर्वे को लेकर भी गंभीर आरोप

बाढ़ के बाद नुकसान के सर्वे को लेकर भी ग्रामीणों की शिकायतों का हवाला देते हुए धनेन्द्र साहू ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई प्रभावित लोगों के अनुसार सर्वे करने पहुंचे कर्मचारियों ने वास्तविक नुकसान दर्ज करने में आनाकानी की।

ग्रामीणों के हवाले से यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों द्वारा उच्च अधिकारियों के निर्देश का हवाला देकर सभी प्रकार की क्षति दर्ज नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा की अगर सही क्षति दर्ज नहीं की जा रही तो नुकसान का सही मुआवजा कैसे मिलेगा।

फसल, मकान और पशुधन के नुकसान का मांगा निष्पक्ष आकलन

धनेन्द्र साहू ने मांग की है कि अभनपुर सहित प्रदेश के सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों को बस्तर की तर्ज पर 10 हजार रुपये की अतिरिक्त राहत राशि दी जाए। साथ ही पटवारी और राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष पंचनामा तैयार करें और प्रभावित परिवारों द्वारा बताई गई वास्तविक क्षति को सर्वे में दर्ज करें।

उन्होंने फसल, मकान, पशुधन और घरेलू सामान के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर प्रभावितों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।

बाढ़ के बाद राहत को लेकर गरमाई सियासत

अभनपुर क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान और राहत वितरण को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर प्रशासन द्वारा राहत एवं नुकसान के आकलन की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है, वहीं पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू ने सरकार से सवाल किया है कि जब आपदा सभी के लिए समान थी, तो राहत का वितरण भी सभी प्रभावित परिवारों के लिए समान आधार पर क्यों नहीं हो रहा है।

अब देखना होगा कि सरकार और जिला प्रशासन इन आरोपों और मांगों पर क्या जवाब देता है और बाढ़ प्रभावित परिवारों के नुकसान का आकलन किस स्तर तक किया जाता है।

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