सावधान! कहीं आप भी तो नहीं खा रहे यही पनीर : छत्तीसगढ़ में एनालॉग (नकली) पनीर पर लगेगा बैन, जानिए कैसे बनता है एनालॉग पनीर?

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– अगर आप भी होटलों और ढाबों में चटकारे ले-ले कर पनीर खाने के शौकीन है तो जरा संभल जाइए कहीं आप भी ऐसा ही पनीर तो नहीं खा रहे जो आपके स्वास्थ्य को भारी नुकशान पहुंचा रहा। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में एनालॉग पनीर (नकली पनीर) के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का बड़ा फैसला लिया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और जल्द ही इसका आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा। आदेश लागू होने के बाद प्रदेश में एनालॉग पनीर का निर्माण, भंडारण और व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह फैसला खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई के बाद लिया गया है। हाल ही में रायपुर की एक पनीर फैक्ट्री पर छापा मारकर करीब 1,700 किलो पनीर के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। पिछले एक वर्ष में रायपुर में लगभग 4,200 किलो संदिग्ध पनीर पर कार्रवाई की जा चुकी है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर दूध के बजाय वनस्पति तेल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, स्टार्च और अन्य खाद्य सामग्री से तैयार किया जाता है। इसकी लागत कम होने के कारण कई होटल, ढाबे और फूड कारोबारियों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है। हालांकि यदि इसे असली पनीर बताकर बेचा जाए, तो यह उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी और खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
जानकारी के अनुसार नकली दूध, पनीर और खोया तैयार करने के लिए सबसे पहले वनस्पति तेल या अन्य खाद्य तेल, मिल्क पाउडर, यूरिया, नमक, पानी और चीनी को मिलाकर नकली दूध तैयार किया जाता है। इसके बाद इसी मिश्रण में कैस्टर ऑयल, सपरेटा दूध, यूरिया और थोड़ी मात्रा में असली दूध मिलाकर गाढ़ा मिश्रण बनाया जाता है। अंत में तैयार पेस्ट में इसी घोल से पनीर और खोया तैयार किया जाता है।
कई फैक्ट्रियों में यह खराब क्वालिटी के तेल, डालडा, पाम ऑयल, तेल, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, मैदा और हानिकारक केमिकल से बनाया जाता है। रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों और उड़ीसा में भी यह पनीर सप्लाई किया जा रहा है। ऐसे हानिकारक सामानों से बने पनीर ये स्वास्थ्य के लिये बहुत ही खतरनाक हैं।
बनाने की लागत में बड़ा अंतर
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही जानकारी और बाजार के सामान्य अनुमान के अनुसार 1 किलो असली पनीर बनाने के लिए 5 से 6 लीटर दूध की आवश्यकता होती है। यदि दूध की कीमत करीब 60 रुपये प्रति लीटर मानी जाए तो केवल दूध की लागत लगभग 360 रुपये होती है। इसमें निर्माण, पैकेजिंग और मुनाफा जोड़ने के बाद असली पनीर की कीमत लगभग 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंचती है।
वहीं एनालॉग (नकली) पनीर की उत्पादन लागत केवल 160 से 180 रुपये प्रति किलो होती है। इसे दूध पाउडर और वनस्पति तेल जैसी सामग्री से तैयार किया जाता है और बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक बेचा जाता है। कम लागत के कारण कई जगह इसका उपयोग किया जाता रहा है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य से समझौता नहीं
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। प्रतिबंध लागू होने के बाद एनालॉग पनीर के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर पूरी तरह रोक रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
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