NCISM का बड़ा निर्णय: पंजीकृत आयुष चिकित्सकों को “झोलाछाप” या “फर्जी डॉक्टर” कहना अवैधानिक, अपमानजनक शब्दों पर कानूनी कार्रवाई संभव

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने 29 जुलाई 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण परिपत्र में स्पष्ट किया है कि BAMS, BUMS, BSMS एवं BSRMS जैसी मान्यता प्राप्त डिग्रीधारी तथा विधिवत पंजीकृत भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों को सार्वजनिक रूप से “झोलाछाप” अथवा “फर्जी डॉक्टर” कहना किसी भी प्रकार से विधिसम्मत नहीं है। आयोग ने कहा है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग चिकित्सकों की गरिमा, प्रतिष्ठा एवं उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
इस संबंध में छत्तीसगढ़ आयुर्वेद अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. गदाधर पांडा ने कहा कि यह परिपत्र देशभर के आयुष चिकित्सकों के सम्मान और कानूनी अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा कि वर्षों से कुछ मंचों एवं सोशल मीडिया पर पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाता रहा है, जिसे अब NCISM ने स्पष्ट रूप से अनुचित और अवैधानिक बताया है। उन्होंने सभी चिकित्सकों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी प्रकार के मानहानिकारक प्रचार का विधिसम्मत प्रतिरोध करने का आह्वान किया।
वैधानिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता
संघ के कार्यकारिणी सदस्य एवं परिषद सदस्य पद के प्रत्याशी डॉ. ऐश्वर्य कुमार साहू ने कहा कि यह परिपत्र केवल आयुष चिकित्सकों के सम्मान की रक्षा नहीं करता, बल्कि जनता के बीच भी यह स्पष्ट संदेश देता है कि NCISM अधिनियम, 2020 के अंतर्गत पंजीकृत चिकित्सक पूर्णतः वैधानिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति, संस्था या माध्यम पंजीकृत आयुष चिकित्सकों के लिए “झोलाछाप” या “फर्जी डॉक्टर” जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करता है, तो संबंधित चिकित्सक विधिक कार्रवाई करने के अधिकार रखते हैं। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों के आत्मसम्मान और पेशेवर गरिमा की महत्वपूर्ण जीत बताया।
छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/KHz20xYe8ouK4y2vqJnOXl
यह खबर भी जरुर पढ़े
अकलवारा में वृक्षारोपण एवं नवनीकृत हर्बल गार्डन का हुआ लोकार्पण, औषधीय पौधों का किया गया वितरण











