आधार कार्ड दुरुपयोग का डर दिखाकर साइबर जाल: फर्जी पुलिस बनकर शिक्षिका से 14.60 लाख की ठगी, जानिए पूरा मामला

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) किशन सिन्हा :– गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र में साइबर ठगी का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बताकर साइबर ठगों ने एक शिक्षित महिला को ऐसा झांसा दिया कि वह देखते ही देखते 14.60 लाख रुपए गंवा बैठीं। आधार कार्ड के दुरुपयोग और कानूनी कार्रवाई के डर का सहारा लेकर ठगों ने सुनियोजित तरीके से शिक्षिका को मानसिक दबाव में लिया और किश्तों में मोटी रकम ट्रांसफर करवा ली।

फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर डराया

मिली जानकारी के मुताबिक, ठगों ने महिला शिक्षिका से संपर्क कर उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया जा रहा है और उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो सकती है। इस डर और मानसिक दबाव का फायदा उठाते हुए ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से बातचीत की और खुद को पुलिस अधिकारी साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज भी दिखाए।

लगातार दबाव और कानूनी डर के माहौल में महिला ने पहले लगभग 7 लाख रुपए ट्रांसफर किए, जिसके कुछ दिन बाद फिर से करीब 7 लाख 50 हजार रुपए की दूसरी किस्त भेज दी गई।

अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए 14.60 लाख

सूत्रों के अनुसार ठगी की यह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया है। करीब 7 लाख 10 हजार रुपए राजस्थान के कोटा क्षेत्र के खाते में भेजे गए, जबकि लगभग 7.50 लाख रुपए रायपुर स्थित एक खाते में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा अन्य खातों में भी राशि भेजी गई है।

मामले की शिकायत के बाद पुलिस की तत्परता से करीब 4 लाख से अधिक राशि को बैंक खाते में होल्ड करवाने में सफलता मिली है, जिससे पीड़िता को आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है।

पीड़िता पहले भी हो चुकी है ठगी का शिकार

बताया जा रहा है कि पीड़ित शिक्षिका इससे पहले भी करीब एक साल पूर्व इसी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हो चुकी थीं, जिसमें उन्होंने लगभग 30 से 35 हजार रुपए गंवाए थे। उस समय उन्होंने इस घटना की जानकारी पुलिस को देना उचित नहीं समझा, जिससे ठगों को उनके बारे में दोबारा जानकारी जुटाने और उन्हें फिर से निशाना बनाने का मौका मिल गया। पीड़िता की चुप्पी से ठगों के हौसले बुलंद हो गए।

जांच में जुटी पुलिस

जानकारी के अनुसार 9 मार्च के आसपास पीड़िता पहली बार ठगी का शिकार हुई और डर के कारण बड़ी रकम ट्रांसफर की। इसके बाद ठग लगातार दबाव बनाकर और पैसे ठग लिए। जब ठगों ने और अधिक पैसों की मांग शुरू की, तब महिला को संदेह हुआ और अंततः उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। घटना की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया है। पुलिस की टीम साइबर ठगों और ट्रांसफर किए खातों की जानकारी जुट रही है। वहीं ठगों के खाते में मौजूद राशि को होल्ड करा दिया गया है।

4.50 लाख कराया गया होल्ड

गरियाबंद एसडीओपी गरिमा दादर ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर अपराध दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। तकनीकी एवं अन्य माध्यमों से आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक करीब 4 लाख 50 हजार रुपए होल्ड करवा दिए गए हैं और जल्द ही आरोपियों को पकड़ने की उम्मीद है।

साइबर ठगों के जाल में फंस रहे सभी वर्ग

यह घटना साफ तौर पर बताती है कि साइबर अपराध अब केवल अनजान या कम पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षित और जागरूक वर्ग भी इनके जाल में फंस रहे हैं। केवल पढ़ा-लिखा होना ही सुरक्षा की गारंटी नहीं है, बल्कि डिजिटल सतर्कता, सही जानकारी और समय पर निर्णय लेना कहीं ज्यादा जरूरी है। अक्सर ठग डर और दबाव का माहौल बनाकर लोगों से जल्दबाजी में फैसले करवाते हैं, जिसका खामियाजा भारी आर्थिक नुकसान के रूप में सामने आता है।

पुलिस और प्रशासन द्वारा लगातार साइबर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका वास्तविक प्रभाव तभी दिखेगा जब लोग खुद भी सजग रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय सत्यापन करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ठगी का शिकार होने पर उसे छिपाने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देना चाहिए, क्योंकि देरी या चुप्पी अपराधियों को और अधिक मजबूत बनाती है। यदि समय रहते शिकायत की जाए, तो न केवल नुकसान की भरपाई की संभावना बढ़ती है, बल्कि ऐसे गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई भी संभव हो पाती है।

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