चक्रवाती तूफान का अलर्ट: छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी, प्रशासन हाई अलर्ट पर; कई जिलों में स्कूल बंद

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– बंगाल की खाड़ी में विकसित चक्रवात तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी से अति भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रदेश के कई जिलों में प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने, राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी रखने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने की स्थिति को देखते हुए बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की संभावना पर भी निगरानी रखी जा रही है।
28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका
मौसम संबंधी चेतावनियों के अनुसार 28 और 29 अक्टूबर को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। चक्रवाती तूफान के आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने के साथ छत्तीसगढ़ में भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका है। तेज हवाओं, जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने की अपील की है।
कई जिलों में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
संभावित भारी बारिश को देखते हुए नारायणपुर जिले में 28 और 29 अक्टूबर को सभी शासकीय, अशासकीय एवं अनुदान प्राप्त विद्यालयों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में दो दिन का अवकाश घोषित किया गया है। दंतेवाड़ा और कोण्डागांव में भी 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। अलग-अलग जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी में अवकाश की अवधि अलग घोषित की गई है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला कलेक्टरों को स्थानीय मौसम की स्थिति और आवश्यकता के अनुसार शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों में अवकाश घोषित करने का अधिकार दिया है। प्रशासन का कहना है कि विद्यार्थियों को बारिश और तेज हवाओं के दौरान स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
बस्तर में बाढ़ से निपटने की तैयारी, राहत शिविर तैयार
बस्तर जिले में चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। इंद्रावती, मार्कण्डी और नारंगी नदियों के तटीय तथा निचले इलाकों के गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की जानकारी दी जा रही है।
प्रशासन ने 18 से अधिक स्कूल भवनों, सामाजिक भवनों, मंगल भवनों और धर्मशालाओं को राहत शिविर के रूप में तैयार रखा है। नगर सेना, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की सहायता से संभावित बचाव कार्यों की तैयारी की गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सभी विभागों को अलर्ट, अस्पतालों में तैयारी
छत्तीसगढ़ के अधिकांश जिलों में कलेक्टरों ने राजस्व, लोक निर्माण, जल संसाधन, विद्युत, स्वास्थ्य, नगरीय निकाय और पंचायत विभागों को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा गया है।
स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, एम्बुलेंस और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बिजली के तार या खंभे गिरने, पेड़ उखड़ने अथवा सड़कें बाधित होने की स्थिति में तत्काल सुधार के लिए संबंधित विभागों को मशीनरी और मरम्मत दल तैयार रखने को कहा गया है। निचले इलाकों में जल निकासी, राहत शिविरों में पेयजल और भोजन की व्यवस्था तथा जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की जा रही है।
गंगरेल बांध से छोड़ा जा सकता है अतिरिक्त पानी
धमतरी जिले में रविशंकर सागर बांध यानी गंगरेल सहित अन्य जलाशयों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। संभावित भारी बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक बढ़ने पर गंगरेल बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा जा सकता है। प्रशासन ने नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलप्रवाह वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
जल संसाधन विभाग को जलस्तर की निगरानी करने तथा बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले क्षेत्रों के गांवों को समय रहते सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों को भी सावधानी बरतने की सलाह
संभावित बारिश को देखते हुए किसानों को धान की कटाई फिलहाल स्थगित रखने, पहले से काटी गई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसान फसल नुकसान की सूचना देने के लिए कृषि रक्षक हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं। किसानों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देने की अपील की गई है।
अफवाहों से बचने प्रशासन की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। उफनते नदी-नालों या जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम न लें। बिजली के खंभों, टूटे तारों, पेड़ों और जर्जर भवनों से दूरी बनाए रखें। निचले इलाकों में रहने वाले परिवार सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल मौसम विभाग तथा प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों और निर्देशों का पालन करें।
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