नवापारा में धूमधाम से मना भगवान परशुराम प्राकट्य उत्सव, नगरवासियों के लिए सौंपे मोक्ष रथ और शव फ्रीजर

ब्राह्मण ने पत्रकारों का किया सम्मान

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) :– नवापारा ब्राम्हण समाज द्वारा भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम जी का प्राकट्य उत्सव रायपुर रोड स्थित विप्र भवन में रविवार को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग एवं मातृशक्तियां शामिल हुई। सुबह 9 बजे पंडित दिनेश तिवारी-संतोष मिश्रा के मंत्रोच्चारण के बीच विधि-विधान के साथ भगवान परशुराम जी का पूजा-अर्चना किया गया। उपस्थित ब्राम्हण समाज के लोगो ने पूजा के दौरान पूरे क्षेत्रवासियो और जनमानस की सुख समृद्धि व खुशहाली के लिए भगवान परशुराम जी से मंगल कामना किया।

भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेना अत्यंत आवश्यक – प्रभात मिश्रा

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि कहीं भवन बनता है तो नींव के पत्थर ओझल हो जाते है। भवन खड़ा हो जाता है। श्री मिश्रा ने भगवान परशुराम के जीवन दर्शन से समाज, परिवार और प्रकृति को जोड़ने की सीख दी। कहा कि परशुराम केवल एक धार्मिक या पौराणिक पात्र नहीं हैं, बल्कि वे समाज, परिवार और प्रकृति के संतुलन के प्रतीक भी हैं। कहा कि आज के बदलते परिवेश में जब सामाजिक मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है, ऐसे समय में भगवान परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने बताया कि परशुराम का जीवन अनुशासन, न्याय और संतुलन का आदर्श प्रस्तुत करता है। वे अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति के प्रतीक हैं, वहीं परिवार के प्रति उनकी निष्ठा और प्रकृति के प्रति उनका जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। श्री मिश्रा ने साहित्यिक दृष्टिकोण से भी भगवान परशुराम के चरित्र का विश्लेषण करते हुए कहा कि भारतीय साहित्य में उनका उल्लेख अनेक ग्रंथों में मिलता है।

उन्होंने कहा कि मैं स्वयं साहित्य के क्षेत्र से जुड़ा हूँ, इसलिए यह कहना चाहता हूँ कि परशुराम का चरित्र केवल कथा नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है, जो हर युग में प्रासंगिक बना रहता है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने अनेक संघर्षों का सामना किया है, जिनमें 1965 के युद्ध जैसे कठिन दौर भी शामिल हैं। ऐसे समय में हमारे सांस्कृतिक आदर्श और नायकों ने देशवासियों को एकजुट रखने का कार्य किया। परशुराम जैसे आदर्श व्यक्तित्व हमें यह सिखाते हैं कि संकट की घड़ी में धैर्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलना ही सही दिशा है।

परशुराम के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रायपुर से पहुंचे समाजसेवी अजय शर्मा ने भगवान परशुराम के आदर्शों को आज के समाज में लागू करने पर बल दिया। कहा कि परिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करना, समाज में नैतिकता को बढ़ावा देना और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने आह्वान किया कि वे भगवान परशुराम के सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं और एक संतुलित, समृद्ध एवं संस्कारित समाज के निर्माण में योगदान दें।

संगठन में बड़ी ताकत – श्यामकिशोर

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर स्वागत भाषण देते हुए ब्राम्हण समाज नवापारा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार श्यामकिशोर शर्मा ने कहा कि संगठन में बड़ी ताकत होती है अतएव इस बात का ध्यान रखकर एकता बनाए रखे। यहां आज जो मोक्ष रथ और शव फ्रीजर का लोकार्पण हुआ है इसकी पूरी रूपरेखा ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष प्रसन्न शर्मा एवं नगर पालिका के पूर्व सभापति रमेश तिवारी ने बनाई। जिसके सहयोग में समाज के सभी लोगो का शानदार योगदान रहा।

पत्रकारों का किया सम्मान

कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष प्रसन्न शर्मा एवं महिला समाज के अध्यक्ष रेखा तिवारी ने किया। इस अवसर पर स्थानीय पत्रकारों का सम्मान ब्राम्हण समाज द्वारा प्रतीक चिन्ह एवं श्रीफल देकर किया गया। कार्यक्रम के दौरान मोक्ष रथ एवं शव फ्रीजर का लोकार्पण मुख्य अतिथि प्रभात मिश्रा एवं समाज के लोगो द्वारा किया गया। कार्यक्रम के शुरू होने के पहले मोक्ष रथ को पूरे शहर में लोगो की जानकारी के लिए सायरन बजाते हुए घुमाया गया

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य आर.बी. शर्मा, पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय, समाज के वरिष्ठजन मधुसूदन शर्मा, सनत शर्मा, ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष प्रसन्न शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश शुक्ला, पूर्व नगर परिषद सभापति रमेश तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार श्यामकिशोर शर्मा, राजिम ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष सौरभ शर्मा एवं समाज के वरिष्ठजन अजय तिवारी, आशीष दीवान, ज्ञानेश शर्मा, कैलाश तिवारी, शिव तिवारी, अंकित शर्मा, अनंत पुराणिक, लक्ष्मीनारायण मिश्रा, दानीशंकर शर्मा, सुनील तिवारी,

मनहरण शर्मा, शिवकुमार पांडे, गुड्डु मिश्रा, जयंत तिवारी, दुर्गाप्रसाद शर्मा, संतोष शर्मा, पिल्लू शर्मा, सपन शर्मा, विवेक शर्मा, चुन्नू शर्मा, प्रफुल्ल दुबे, डॉ. ए.के. शर्मा, श्याम शर्मा, राम शर्मा, कौस्तुभ शर्मा, क्षेत्रेश तिवारी, चंद्रेश तिवारी, शेखर मिश्रा, आलोक शर्मा, विवेक शर्मा, पं. दिनेश तिवारी, संतोष तिवारी, संतोष मिश्रा, मुन्ना मिश्रा, युवराज पांडे, दिनेश शर्मा, राकेश शर्मा, प्रदीप शुक्ला, कमल शर्मा, संजय शर्मा, ललित पांडे, महेश तिवारी, प्रदीप मिश्रा, अभिजीत मिश्रा, अनुराग मिश्रा, अभिनव मिश्रा,

सुअंजना उपाध्याय, कस्तूरी तिवारी, भुनेश्वरी शर्मा, कुमुदिनी शर्मा, विद्या तिवारी, और डॉ. मधुरानी शुक्ला; रेखा तिवारी, सुभाषिनी शर्मा, तनु मिश्रा, सोमा शर्मा, रेखा शुक्ला, नंदिनी शर्मा, संगीता शर्मा, सृति शर्मा, कुशली दीवान, सुषमा शर्मा, कौमुदी शर्मा, अनामिका तिवारी, योगिता दुबे, सुश्री छाया राही, रुचि शर्मा, किरण तिवारी, रश्मि तिवारी, वंदना शर्मा, रेणुका शर्मा, ममता शर्मा, तारिणी शर्मा, कुमुद पुराणिक, पूनम दीवान सहित बड़ी संख्या में मातृशक्तियां मौजूद थी।

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