‘कैशलेस’ का नारा, अब शुल्क का बोझ! UPI शुल्क को लेकर सुरेन्द्र साहू का केंद्र पर हमला, बोले- व्यापारी दुकान चलाए या टैक्स-शुल्क चुकाए
‘कैशलेस’ का नारा देकर अब शुल्क की मार? बोले- व्यापारी दुकान चलाए या टैक्स-शुल्क चुकाए

(छत्तीसगढ़ प्रयाग न्यूज) नवापारा :– मंदी और महंगाई से जूझ रहे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नवापारा के महामंत्री सुरेन्द्र साहू ने व्यापारिक UPI भुगतानों पर शुल्क लगाए जाने के निर्णय को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए शुल्क वापस लेने की मांग की है।
सुरेन्द्र साहू ने कहा कि एक ओर महंगाई के कारण आम लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर बाजार में मंदी की स्थिति से व्यापारी पहले ही परेशान हैं। ऐसे समय में डिजिटल लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
‘कैशलेस’ को बढ़ावा दिया, अब शुल्क का सवाल
साहू ने कहा कि सरकार ने पिछले वर्षों में डिजिटल और कैशलेस भुगतान को तेजी से बढ़ावा दिया। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक ने UPI को कारोबार का अहम हिस्सा बना लिया। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने से व्यापारियों में असमंजस और चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब सरकार ने देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, तो अब उसी डिजिटल व्यवस्था को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से क्यों जोड़ा जा रहा है? यह व्यापार करने की लागत को बढ़ाने वाला कदम है।”
व्यापारी की बिक्री, पूरा मुनाफा नहीं
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी व्यापारी के खाते में आने वाली पूरी बिक्री उसकी कमाई या मुनाफा नहीं होती। दुकान का किराया, बिजली, कर्मचारियों का वेतन, माल की लागत, टैक्स और अन्य खर्च निकालने के बाद व्यापारी के पास वास्तविक लाभ बचता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका सीधा असर छोटे कारोबारियों की लागत पर पड़ेगा। अंततः इसकी भरपाई या तो व्यापारी को अपनी जेब से करनी होगी या फिर इसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
महंगाई और मंदी के बीच दोहरी मार का आरोप
सुरेन्द्र साहू ने कहा कि महंगाई के चलते आम परिवार पहले ही अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं। इसका असर बाजार की बिक्री पर भी पड़ रहा है। ऐसे दौर में कारोबार की लागत बढ़ाने वाली नीतियां छोटे व्यापारियों के लिए चुनौती बढ़ा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक मजबूती केवल सरकारी आंकड़ों और प्रचार से नहीं, बल्कि बाजार में बढ़ती खरीदारी, व्यापारियों की आय और आम परिवार की बचत से दिखाई देती है।
शुल्क वापस लेने की मांग
सुरेन्द्र साहू ने केंद्र सरकार से व्यापारिक UPI लेन-देन पर लगाए जा रहे शुल्क के निर्णय पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ देने के बजाय उन्हें राहत देने वाली नीतियों पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि व्यापारियों की लागत लगातार बढ़ती रही तो इसका असर बाजार और आम उपभोक्ता दोनों पर पड़ सकता है।
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